Top 10 Yog Pracharak

Joginder Singh

Mansa (119)

Harbanslal

Rampur (118)

Dharmendra Kumar

Basti (119)

Punaram Sahu

Jhabua (111)

Vidhya Shankar

Sonbhadra (114)

Vinesh Kumar

Baghpat (107)

Maneesh Kumar Pal

Allahabad (79)

Renu Prajapati

Bokaro (121)

Vijay Kumar

Sambalpur (119)

Subhas Chandra

Pratapgarh (113)

FACTS ABOUT YOG PRACHARAK Prakalp

475

Districts

29,3406

5 Day Yog Camp

90,477

School Camps

1,94,959

Arogya Sabha

26,824

Swacch Bharat Mission

31,957

Tree Plantation

11,286

Media Press Notes

quotes

“जीवन को छोटे उद्देश्यों के लिए जीना जीवन का अपमान है।”

“मैं माँ भारती का अम्रतपुत्र हूँ, “माता भूमि: पुत्रोहं प्रथिव्या:।”

“निष्काम कर्म, कर्म का अभाव नहीं, कर्तृत्व के अहंकार का अभाव होता है।”

“मेरे भीतर संकल्प की अग्नि निरंतर प्रज्ज्वलित है। मेरे जीवन का पथ सदा प्रकाशमान है।”

“पराक्रमशीलता, राष्ट्रवादिता, पारदर्शिता, दूरदर्शिता, आध्यात्मिक, मानवता एवं विनयशीलता मेरी कार्यशैली के आदर्श हैं।”

Swami Ramdev Ji

मेरे पूर्वज, मेरे स्वाभिमान।

गुणों की वृद्धि और क्षय तो अपने कर्मों से होता है।

असंयम की राह पर चलने से आनन्द की मंजिल नहीं मिलती।

आयुर्वेद हमारी मिट्टी हमारी संस्कृति व प्रक्रति से जुडी हुई निरापद चिकित्सा पध्दति है।

सज्जन व कर्मशील व्यक्ति तो यह जानता है कि शब्दों की अपेक्षा कर्म अधिक जोर से बोलते हैं।
अत: वह अपने शुभकर्म में ही निमग्न रहता है।

Acharya Balkrishana Ji

“जीवन को छोटे उद्देश्यों के लिए जीना जीवन का अपमान है।”

“मैं माँ भारती का अम्रतपुत्र हूँ, “माता भूमि: पुत्रोहं प्रथिव्या:।”

“निष्काम कर्म, कर्म का अभाव नहीं, कर्तृत्व के अहंकार का अभाव होता है।”

“मेरे भीतर संकल्प की अग्नि निरंतर प्रज्ज्वलित है। मेरे जीवन का पथ सदा प्रकाशमान है।”

“पराक्रमशीलता, राष्ट्रवादिता, पारदर्शिता, दूरदर्शिता, आध्यात्मिक, मानवता एवं विनयशीलता मेरी कार्यशैली के आदर्श हैं।”

Swami Ramdev Ji

मेरे पूर्वज, मेरे स्वाभिमान।

गुणों की वृद्धि और क्षय तो अपने कर्मों से होता है।

असंयम की राह पर चलने से आनन्द की मंजिल नहीं मिलती।

आयुर्वेद हमारी मिट्टी हमारी संस्कृति व प्रक्रति से जुडी हुई निरापद चिकित्सा पध्दति है।

सज्जन व कर्मशील व्यक्ति तो यह जानता है कि शब्दों की अपेक्षा कर्म अधिक जोर से बोलते हैं।
अत: वह अपने शुभकर्म में ही निमग्न रहता है।

Acharya Balkrishana Ji

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