Top 10 Yog Pracharak
1

Joginder Singh

Yog Camp: 121 Arogya Shabha: 697

City: Mansa School Camp: 406

2

Harbanslal

Yog Camp: 119 Arogya Shabha: 1061

City: Rampur School Camp: 23

3

Dharmendra Kumar

Yog Camp: 122 Arogya Shabha: 599

City: Basti School Camp: 453

4

Punaram Sahu

Yog Camp: 111 Arogya Shabha: 592

City: Jhabua School Camp: 449

5

Vidhya Shankar

Yog Camp: 116 Arogya Shabha: 570

City: Sonbhadra School Camp: 445

6

Vinesh Kumar

Yog Camp: 109 Arogya Shabha: 587

City: Baghpat School Camp: 413

7

Maneesh Kumar Pal

Yog Camp: 79 Arogya Shabha: 650

City: Allahabad School Camp: 334

8

Subhas Chandra

Yog Camp: 115 Arogya Shabha: 549

City: Pratapgarh School Camp: 394

9

Vijay Kumar

Yog Camp: 120 Arogya Shabha: 567

City: Sambalpur School Camp: 365

10

Renu Prajapati

Yog Camp: 122 Arogya Shabha: 682

City: Bokaro School Camp: 247

FACTS ABOUT YOG PRACHARAK Prakalp

475

Districts

29,3406

5 Day Yog Camp

90,477

School Camps

1,94,959

Arogya Sabha

26,824

Swacch Bharat Mission

31,957

Tree Plantation

11,286

Media Press Notes

quotes

जीवन अमूल्य है, जीवन को छोटे उदेश्यों के लिय जीना जीवन का अपमान है | अपनी शक्तियों को तुच्छ कामों में व्यथ खर्च करना, व्यसनों एवं वासनाओं में जीवन का बहुमूल्य समय नष्ट करना, जीवन का तिरस्कार है |
हमारा लक्ष्य वही है, जो हम मानते हैं, जो हम खुद तय करते हैं | हमारा जीवन वैसा ही होगा, जैसा हम इसे बनायेंगे | हमें शास्त्रसम्मत कल्याणकारी कर्म व् आचरण ही जीवन –लक्ष्य (आत्मज्ञान ) तक पहुंचा सकता हैं |

आचार्य बालकृष्ण जी

जीवन एक उत्सव है तथा परमात्मा का एक बड़ा उपहार है| मानव-जीवन परमात्मा की एक सर्वश्रेष्ठ कृति है| यह शरीर देवालय, शिवालय व् भगवान् का मंदिर है | आत्मा अजर, अमर, नित्य , अविनाशी, ज्योतिमर्य, तेजोमय, शांतिमय और परिपूर्ण गुणों से युक्त पूर्ण चेतन है |

आचार्य बालकृष्ण जी

जीवन का प्रत्येक दिन मेरा एक नया जन्म है और मेरा एक दिन का समय मेरे लिय पुरे जीवन के बराबर है | मैं आज अभी से ही पूर्ण पत्परता, सहगता व् सहजता के साथ वे सभी श्रेष्ट कार्य प्रारम्भ करूंगा/करुँगी, जिसके लिय परमात्मा ने मुझे इस संस्कार में भेजा है |

आचार्य बालकृष्ण जी

प्रेम, करुणा, शांति, वात्सल्य ही मेरा स्वरूप या स्वधर्म है | मेरा कर्म ही मेरा धर्म है | मैं मात्र पाषण प्रतिमाओं का पूजक नहीं अपितु जिन जीवरूपी प्रतिमाओं को मेरे परमात्मा ने स्वयं गढ़ा है व उनमें, स्वयं जीवों की आत्मा में मेरा परमात्मा विराजमान है| मन चेतन्य, मूर्त्त ब्रह्म का उपासक हूँ| प्रलोभ

योग ऋषि स्वामी रामदेव जी

हमारी मानवीय चेतना में वैश्विक चेतना अवतरित होने लगती है और दुनिया भ्रमवश इन्सान को भगवन की तरह पूजने लगती है | योगेश्वर श्री कृष्ण, मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम, महायोगी शिव, भगवत्ता को प्राप्त महावीर स्वामी, समर्पण से सम्बोधि को प्राप्त हुए गुरुनानकदेव, गुरुगोविंद सिंह, महर्षि दयानंद, स्वामी विवेकानंद में जो अलौकिक शक्तियाँ या शिद्धियाँ थीं, वे समस्त शक्तियां हमारे भीतर सन्निहित हैं | योगी को कभी स्वयं को दीनहीन दुःखी असहाय या अकेला नहीं मन्ना चाहिए | प्रतिपल “अहम् ब्रह्मास्मि” मैं विरत हूँ | मैं परमात्मा का प्रतिनिधि हूँ | इस प्रति पर मेरा जन्म एम् महान उद्देश्य को लेकर हुआ है | मुझमें धरती सा धैर्य, अग्नि जैसा तेज, वायु सा वेग, जल जैसी शीतलता व आकाश जैसी विराटता है |

योग ऋषि स्वामी रामदेव जी

 

मेरे पूर्वज, मेरे स्वाभिमान।

गुणों की वृद्धि और क्षय तो अपने कर्मों से होता है।

असंयम की राह पर चलने से आनन्द की मंजिल नहीं मिलती।

आयुर्वेद हमारी मिट्टी हमारी संस्कृति व प्रक्रति से जुडी हुई निरापद चिकित्सा पध्दति है।

सज्जन व कर्मशील व्यक्ति तो यह जानता है कि शब्दों की अपेक्षा कर्म अधिक जोर से बोलते हैं।
अत: वह अपने शुभकर्म में ही निमग्न रहता है।

Acharya Balkrishana Ji

“जीवन को छोटे उद्देश्यों के लिए जीना जीवन का अपमान है।”

“मैं माँ भारती का अम्रतपुत्र हूँ, “माता भूमि: पुत्रोहं प्रथिव्या:।”

“निष्काम कर्म, कर्म का अभाव नहीं, कर्तृत्व के अहंकार का अभाव होता है।”

“मेरे भीतर संकल्प की अग्नि निरंतर प्रज्ज्वलित है। मेरे जीवन का पथ सदा प्रकाशमान है।”

“पराक्रमशीलता, राष्ट्रवादिता, पारदर्शिता, दूरदर्शिता, आध्यात्मिक, मानवता एवं विनयशीलता मेरी कार्यश

योग ऋषि स्वामी रामदेव जी

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