जिंदगी का सफ़र करने वाले मन का दिया तू जलाले

ज़िंदगी का सफर करने वाले
पने मन का दीया तो जलाले
 रात लंबी है गहरा अंधेरा
कौन जाने कहाँ है सवेरा |
तू है अंजान मंजिल का राही
चलते रहना ही है काम तेरा
रौशनी से डगर जगमगाले
 अपने मन का दिया तू जलाले ||
 
वक्त की धार ये कह रही है
कष्ट क्यों आत्मा सह रही है
  देख ऐसी जगह तू खड़ा है |
ज्ञान गंगा वहां बह रही है
बहती गंगा में डुबकी लगा ले,
अपने मन का दिया तू जला ले ||
 
 सूनी -सूनी ये मंजिल की राहें
चूमना तेरे क़दमों को चाहे
गहन वन में कहीं खो न जाना |
भटक जाये न तेरी निगाहें
हर कदम सोचकर तू उठा ले
अपने मन का दिया तू जला ले ||
 
बस तुझे है अकेले ही चलना
    बहुत मुमकिन है गिरना फिसलना.
  गिरके गिरना नहीं बात कुछभी
 है बड़ी बात गिरकर संभलना |
  पथिक ये बात दिल में बसाले
 अपने मन का दिया तू जलाले
ज़िंदगी का सफर करने वाले
अपने मन का दीया तो जलाले...||

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